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किसान महापड़ाव आंदोलन में सांसद की अनुपस्थिति पर किसानों में नाराज़गी तेज

19 दिनों से कड़ाके की सर्दी में संघर्षरत किसानों ने सांसद से समर्थन की की अपील

डीडवाना में चल रहे किसान महापड़ाव आंदोलन में शुक्रवार को किसानों ने अपनी पीड़ा व्यक्त करते हुए क्षेत्रीय सांसद तक अपनी बात पहुँचाने की पुनः मांग उठाई। किसानों ने कहा कि उन्होंने आंदोलन की शुरुआत से ही सांसद से न्याय दिलाने हेतु सहयोग का निवेदन किया था, साथ ही सांसद के आंदोलन में स्वयं शामिल होने पर भी चर्चा हुई थी, मगर अब तक उनकी कोई उपस्थिति देखने को नहीं मिली।

किसानों ने प्रश्न उठाया कि आखिर ऐसी कौन-सी कमी रह गई कि वे जिन नेताओं को पूर्ण समर्थन देकर संसद तक पहुंचाते हैं, वे ही आज किसानों के संघर्ष के समय साथ नहीं खड़े दिखाई दे रहे। ग्रामीणों का कहना है कि किसान समाज ने सांसद को भारी समर्थन दिया था, इसलिए आज की स्थिति में उनकी अपेक्षाएँ स्वाभाविक रूप से अधिक हैं।

सर्द रातों में 19 दिन से जारी संघर्ष

किसानों ने बताया कि वे लगातार 19 दिनों से कड़ाके की सर्दी में दिन-रात अपने हकों के लिए संघर्ष कर रहे हैं।

कास्तकारों ने अपनी प्रमुख मांग दोहराई कि वे जिन कब्जासुदा कस्टोडियन जमीनों पर आज़ादी से पहले से खेती करते आए हैं, उन्हीं जमीनों का जिला प्रशासन द्वारा आवंटन और पटा जारी किया जा रहा है, जिसे लेकर वे न्याय की उम्मीद में आंदोलनरत हैं।

किसानों का कहना है कि उन्होंने बड़े विश्वास के साथ अपने सांसद को चुनकर भेजा था और अपेक्षा थी कि कठिन समय में वे उनके साथ खड़े मिलेंगे। किसानों के अनुसार, इस संघर्ष की अवधि में सांसद की ओर से न तो कोई मुलाकात हुई, न ही आंदोलन स्थल पर आकर हाल-चाल लिया गया।

किसानों की भावनाएँ—“हमने भरोसा किया था, साथ की अपेक्षा की थी”

किसान प्रतिनिधियों ने बताया कि आंदोलन के दौरान एक प्रतिनिधिमंडल सांसद से मिला भी था। उस समय सांसद ने आश्वासन दिया था कि जब भी किसानों को उनकी आवश्यकता होगी, वे उनके हकों के लिए सबसे आगे खड़े होंगे।

किसानों का कहना है कि वर्तमान हालात में वे अपने सांसद से ऐसे ही सहयोग और संवेदनशीलता की उम्मीद कर रहे हैं।

किसानों की अपील—सांसद महोदय आंदोलन स्थल पर आएँ

किसानों ने राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के कार्यकर्ताओं और नेतृत्व से आग्रह करते हुए कहा कि सांसद महोदय स्वयं डीडवाना पहुंचकर अनिश्चितकालीन किसान महापड़ाव आंदोलन में शामिल हों और किसानों की समस्याओं को समझते हुए समाधान की दिशा में पहल करें।

किसानों ने कहा कि उनका संघर्ष किसी व्यक्ति या राजनीतिक लाभ का नहीं बल्कि अपने वैध हकों की रक्षा का है। इसलिए क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों से सहयोग और समर्थन की अपेक्षा स्वाभाविक है

ग्लोबल डीडवाना न्यूज

ब्यूरो रिपोर्ट आनंद अम्बापा

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