
जब तक हक की ज़मीन नहीं मिलेगी, संघर्ष जारी रहेगा**
डीडवाना।
किसानों के महापड़ाव को आज 22 दिन पूरे हो गए, लेकिन सरकार तक किसानों की आवाज़ अब तक नहीं पहुँची। लगातार 21 दिनों से किसान खुले आसमान के नीचे धरने पर डटे हुए हैं, फिर भी उनकी न्यायोचित माँगों पर सरकार की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। इसी संघर्ष को और तेज करने तथा सरकार का ध्यान आकर्षित करने के लिए आज युवा शक्ति द्वारा विशाल बाइक रैली और ब्लड डोनेशन कैंप का आयोजन किया जा रहा है।
रैली सुबह 11 बजे रहमान गेट से शुरू होगी, जो शहर के मुख्य मार्गों से होते हुए अस्पताल चौराया, नागौर पुलिया पार कर महापड़ाव स्थल पहुंचेगी।
“जब तक किसानों को उनकी हक़ की ज़मीन नहीं मिलेगी, आंदोलन नहीं रुकेगा” — महापड़ाव समिति
अखिल भारतीय किसान मोर्चा और महापड़ाव समिति ने कहा कि किसान शांतिपूर्ण सत्याग्रह के रास्ते पर चल रहे हैं। उन्होंने याद दिलाया कि बॉर्डर पर काले कानूनों के विरुद्ध हुए किसान आंदोलन में 750 से अधिक किसानों ने प्राण त्याग दिए, लेकिन फिर भी आंदोलन शांतिपूर्वक चला।
समिति ने कहा:“यदि सरकार खून की प्यास रखती है, तो हम हिंसा नहीं करेंगे।हम अपना रक्त किसी की ज़िंदगी बचाने के लिए देंगे…पर अपनी ज़मीन की लड़ाई से पीछे नहीं हटेंगे।”इसी संदेश को पूरे देश तक पहुँचाने के लिए आज ब्लड डोनेशन कैंप रखा गया है—ताकि दुनिया देखे कि किसान लड़ाई लड़ रहा है, लेकिन जान लेने की नहीं… जान बचाने की सोच के साथ।
**किसानों का दृढ़ संकल्प:
‘हमारा खून बहेगा… तो जरूरतमंदों की रगों में’**
महापड़ाव स्थल पर किसानों ने कहा कि इस दौर में लगातार बढ़ रहे हादसों में और आपात स्थितियों में कई लोगों को रक्त की आवश्यकता होती है।
“हमारे किसानों का खून उन लोगों की रगों में बहेगा
जो जिंदगी के लिए संघर्ष कर रहे हैं।
किसान मातृभूमि की रक्षा करते हैं—
और जरूरत पड़ने पर किसी अजनबी की जान भी बचाते हैं।”
रैली में होंगे ये प्रमुख पदाधिकारी भागीरथ जी यादव,कॉमरेड, देवाराम जी मांड्या, मोतीलाल जी शर्मा, रामचंद्र बरड़वा सहित बड़ी संख्या में युवा, किसान व सामाजिक कार्यकर्ता शामिल होंगे। किसानों का यह शांतिपूर्ण आंदोलन अब जन-जन का आंदोलन बनता जा रहा है। आज की रैली और रक्तदान कार्यक्रम से यह संदेश पूरे इलाके में जाएगा कि किसान अपनी ज़मीन, अपने हक़ और अपने स्वाभिमान के लिए अडिग हैं — और यह संघर्ष जीत तक जारी रहेगा।


