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पेंशन के नाम पर ठगी: नेत्रहीन तीन सगे भाई-बहन भुखमरी की कगार पर

रियां बड़ी | पादुकलां। रक्षा चौहान

ग्राम पंचायत पादुकलां की राईका ढाणी में रहने वाले तीन सगे नेत्रहीन भाई-बहन—मुबारक, मुबारद और गुड्डी देवी—इन दिनों भुखमरी की कगार पर पहुंच गए हैं। बचपन से दृष्टिहीन इन भाई-बहनों के पिता का पहले ही देहांत हो चुका है और परिवार में केवल वृद्ध मां ही सहारा हैं। परिवार की आजीविका पूरी तरह सामाजिक सुरक्षा पेंशन पर निर्भर थी, लेकिन बीते करीब 6–7 महीनों से पेंशन बंद होने और एजेंटों द्वारा ठगी के कारण हालात बद से बदतर हो गए हैं।

पेंशन बढ़ाने का झांसा, 7,500 रुपए की ठगी

पीड़ित परिवार का आरोप है कि कुछ समय पहले खुद को सरकारी एजेंट बताने वाले लोग ढाणी में आए और दिव्यांग पेंशन 2,500 रुपए प्रति माह करने का लालच दिया। पेंशन बढ़ाने और समय पर चालू करवाने के नाम पर तीनों भाई-बहनों के दस्तावेज लेकर उनसे करीब 7,500 रुपए वसूल लिए गए। रुपये लेने के बाद न तो पेंशन बढ़ी और न ही बंद पेंशन दोबारा शुरू हुई, बल्कि पूरा भुगतान ही रुक गया।

पंचायत समिति में भी निराशा

पेंशन बंद होने और ठगी की शिकायत लेकर जब पीड़ित परिवार पंचायत समिति रियां बड़ी पहुंचा, तो वहां मौजूद कथित एजेंटों ने कहा—“पहले डेढ़ लाख रुपए जमा करवाओ, तभी फाइल आगे बढ़ेगी और पेंशन शुरू होगी।” नेत्रहीन भाई-बहनों का कहना है कि वे कमाने की स्थिति में नहीं हैं और कई बार घर में एक वक्त का खाना भी नसीब नहीं होता। वृद्ध मां बताती हैं कि हर दिन यह चिंता सताती है कि बच्चों को क्या खिलाएंगे।

ई-मित्र संचालकों और सिस्टम पर आरोप

राईका ढाणी के ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि पेंशन से जुड़े कागजात और प्रक्रिया अधिकारियों व ई-मित्र संचालकों के माध्यम से हुई थी। अब वही सिस्टम वसूली का दबाव बना रहा है और गलत तरीके से पेंशन का लाभ दिखाकर रिकवरी की बात कर रहा है। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि रियां क्षेत्र में सी-लोकॉसिस बीमारी का केवल एक वास्तविक मरीज होने के बावजूद सैकड़ों बुजुर्गों के नाम पर इसी बीमारी की आड़ में पेंशन स्वीकृत दिखाई गई है।

सैकड़ों पेंशनधारी परेशान

ग्रामीणों के अनुसार यह मामला सिर्फ एक परिवार तक सीमित नहीं है। रियां बड़ी और आसपास के क्षेत्रों में सैकड़ों बुजुर्ग और दिव्यांग पेंशनधारी फर्जीवाड़े, तकनीकी गड़बड़ियों और ई-मित्र संचालकों की मनमानी से परेशान हैं। अन्य सरकारी योजनाओं में भी गलत मार्गदर्शन और अतिरिक्त शुल्क वसूली की शिकायतें सामने आ रही हैं।

जांच और त्वरित सहायता की मांग

ग्रामीणों ने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषी एजेंटों और ई-मित्र संचालकों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है। साथ ही, नेत्रहीन तीनों भाई-बहनों की पेंशन तत्काल प्रभाव से बहाल करने और आपात आर्थिक सहायता देने की भी मांग की गई है, ताकि वृद्ध मां और दिव्यांग बच्चों का जीवन सम्मानजनक तरीके से चल सके।

यह मामला एक बार फिर उजागर करता है कि कागजों में मजबूत दिखने वाली सामाजिक सुरक्षा योजनाएं, जमीन पर कमजोर क्रियान्वयन और बिचौलियों की वजह से सबसे जरूरतमंद लोगों के लिए पीड़ा का कारण बन रही हैं।

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