नथावड़ा में सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा का भव्य समापन, वैदिक पूर्णाहुति व संत समागम से गुंजा कालकी माँ मंदिर परिसर

पादूकलां। ग्लोबल डीडवाना न्यूज। रक्षा चौहान निकटवर्ती ग्राम पंचायत नथावड़ा के कालकी माँ मंदिर परिसर में आयोजित सात दिवसीय श्रीमद् भागवत कथा ज्ञान यज्ञ का शुक्रवार को वैदिक मंत्रोच्चार के बीच पूर्णाहुति के साथ सौम्य व आध्यात्मिक वातावरण में भव्य समापन हुआ। कार्यक्रम में क्षेत्रभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे और कथा श्रवण के साथ दिव्य रस में सराबोर हुए।
कथा का शुभारंभ 5 दिसंबर को हुआ था। प्रतिदिन सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक होने वाली कथा में व्यासपीठ पर विराजमान आचार्य हरिकिशन दाधीच ने भक्तों को श्रीमद्भागवत के विभिन्न प्रसंगों, ईश्वर लीला, धर्म–कर्तव्य, आदर्श जीवन, भक्ति–मार्ग और माता–पिता की सेवा जैसे महत्वपूर्ण संदेशों से अवगत कराया। उनकी वाणी और भावपूर्ण प्रस्तुति से वातावरण भक्तिमय बना रहा।सप्तम दिवस का सारांश
सप्तम दिवस पर आचार्य दाधीच ने श्रीकृष्ण–प्रेम, सुदामा–मिलन, परीक्षित मोक्ष, कलियुग के लक्षण, एवं भागवत श्रवण की महिमा पर विशेष प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि सुदामा और श्रीकृष्ण की मित्रता मानव जीवन में निःस्वार्थ प्रेम, विनम्रता व आस्था का सजीव उदाहरण है। परीक्षित मोक्ष कथा के माध्यम से उन्होंने कहा कि जब मनुष्य हर परिस्थिति में ईश्वर स्मरण रखता है, तब मोक्ष का द्वार सहज रूप से खुलता है। भागवत कथा का समापन प्रसंग सुनते हुए श्रद्धालु भाव-विभोर हो उठे।पूर्णाहुति व संत समागम
समापन दिवस पर यज्ञ में श्रद्धालुओं ने आहुति प्रदान की। तेहरे जोड़ो द्वारा विशेष आहुति के साथ यज्ञ की पूर्णाहुति सम्पन्न हुई। इसके बाद सामूहिक आरती और प्रसाद वितरण किया गया, जिसमें गांव-क्षेत्र के सैकड़ों भक्तों ने भाग लिया।कार्यक्रम में महंत श्री योगेंद्र पूरी सरस्वती, गांव के प्रबुद्ध नागरिक, महिला मंडल तथा सामाजिक कार्यकर्ता भी उपस्थित रहे। संत समागम से वातावरण और भी आध्यात्मिक एवं ऊर्जामय बना रहा।आचार्य दाधीच ने कहा कि भागवत कथा का मूल सार यही है कि कथा से प्राप्त दिव्य ज्ञान को व्यवहार में उतारा जाए। जब तक जीवन में भक्ति, सेवा, करुणा और सत्य नहीं उतरते, तब तक कथा श्रवण का उद्देश्य पूर्ण नहीं होता।


